अरवल के दर्शनीय स्थल और अरवल में घूमने की जगह – Arwal tourist Place in Hindi

प्रिय दोस्तों नमस्कार आपको एक बार फिर से अपने रॉयल यात्रा के पोस्ट में मैं ब्रजकिशोर स्वागत करता हूंइस पोस्ट में आपको बिहार के अरवल जिले से रिलेटेड जितनी भी जानकारियां है, वह सब आपको बताऊंगा अरवल जिला में ऐसे कौन-कौन सी चीजें हैं, जहां पर टूरिस्ट लोग घूमने आते हैं, घूमने की दृष्टि से जितनी भी चीजें हैं, और अरवल जिला का जितने भी इतिहास है, सारी चीजें आपको इस पोस्ट में देखने को मिलेगा, तो इस लेख को आप पूरा अंत तक पड़ेगा तभी आपको अरवल जिले की पूरी जानकारी मिलेगी।

अरवल का परिचय – Introduction to Arwal

भारत के बिहार राज्य के 38 जिलों में से एक अरवल जिला है, अरवल शहर सोन नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है, जो सोन नदी गंगा नदी की एक सहायक नदी है। अरवल एक कृषि प्रधान देश है। जो अपने आप में एक इतिहास समेटे हुए हैं अरवल जिले में आपको मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय देखने को मिल जाएगा यह अगस्त 2011 में अस्तित्व में आया। वर्तमान में अरवल शहर की आबादी लगभग 70 लाख के करीब है जिले में अरवल, कलेर, करपी, कुर्था और सूर्यपुर वंशी यह 5 ब्लॉक डिवीजन है। अरवल जिला में कुल पंचायतों की संख्या 65 है, इस जिले में कुल 335 गांव है।

अरवल का इतिहास – History of Arwal

बिहार के सोन नदी के दाहिने किनारे पर अरवल शहर स्थित अरवल जिले का इतिहास बहुत ही ऐतिहासिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं पर संस्कृत के प्रसिद्ध कवि का जन्म हुआ था। बाणभट्ट और राजा हर्षवर्धन की जीवनी के लेखक हर्ष चरित्र नामक पुस्तक का जन्म अरवल जिले के एक बंशी सूर्यपुर नामक गांव में हुआ था। अरवल शहर पहले मगध का एक अंग हुआ करता था। मध्यकाल में बिहार के अरवल जिला में दो ही कागज बनाने के प्रमुख केंद्र थे, जो अरवल नगर और दूसरा बिहार शरीफ था।ऐसा माना जाता है कि बाणभट्ट यही पर स्थित बुढ़वा महादेव (पुराण शिव मंदिर) जिसे स्वयं अपने हाथों से बनवा कर उनकी पूजा की थी। यहां स्थानीय लोगों का मानना है, कि बाणभट्ट यही पर स्थित देवकुंड जाते थे, जो बंसी गांव से 6 मील दूर दक्षिण पश्चिम दिशा में स्थित है, देवकुंड में एक भगवान शिव जी मंदिर है जो बहुत ही प्रसिद्ध है।अरवल शहर भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ है। क्योंकि यहीं ग्राम पंतित में स्थित भगवान विष्णु के पैर के निशान है क्योंकि जब भगवान विष्णु वामन अवतार लिए थे तो उस समय अपना पैर यहीं पर रखे थे, जब भगवान विष्णु ने राजा बलि की तीन पग भूमि मांगी थी, तो पहला पैर और अरवल जिले के पंतीत गांव में और दूसरा चरण आकाश में हो तीसरा चरण राजा बलि के सिर पर रखे थे।

अरवल के पर्यटक स्थल – Arwal Tourist places In Hindi

पर्यटक दृष्टि के हिसाब से देखा जाए तो अरवल में ज्यादातर घूमने के स्थान कम है लेकिन जो भी अस्थान है ऐतिहासिक हैं तो वह सब आपको इस आर्टिकल में देखने को मिलेगा तो इस लेख को आप पूरा अंत तक पढ़िए।

  • गौतम बुद्ध मंदिर
  • फखरपुर मंदिर
  • मधुस्रवा आश्रम
  • मखदूम शाह मजार
  • अगनूर विद्युत जल परियोजना
  • बुधवा महादेव (पुराना शिव मंदिर)
  • भगवान विष्णु के पैर का निशान
  • भीमराव अंबेडकर स्मारक
  • लारी गांव
  • पंचतीर्थ घाम
  • वेलसार सूर्य मन्दिर
  • खटांगी सूर्य मन्दिर
  • वेंकटेश्वर धाम
  • अहियर पुर सूर्य मंदिर
  • मेहंदिया मंदिर
  • हैबातपुर मंदिर

गौतम बुद्ध मंदिर – Gautam Buddha Mandi

भगवान गौतम बुद्ध अरवल जिले के बोधगया नामक स्थान में महाबोधि मंदिर से जुड़ा हुआ एक धार्मिक स्थल और तीर्थ स्थान है। यह प्रसिद्ध इसलिए है क्योंकि यहीं पर गौतम बुद्ध को बोधि वृक्ष के के नीचे प्राप्त हुआ था। प्राचीन काल से बोधगया हिंदुओं और बौद्धों के लिए तीर्थ यात्रा और पूजा का विषय रहा है।यह वही बौद्ध गया है जो बौद्ध धर्म के गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित मुख्य चार स्थलों में से एक है यह गौतम बुद्ध का मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल 2002 में बन गया है।

फखरपुर मंदिर – Fakharpur Temple

फखरपुर मन्दिर ये बिहार के अलवर जिले के फखरपुर पंचायत में स्थित है, यह मंदिर किसी महात्मा की बनाई हुई है। इस मंदिर में राम, लक्ष्मण, सीता जैसे बहुत से नव निर्मित छोटी छोटी मूर्तियां देखने को मिल जाएगी। ये अररिया पंचायत से 3 km की दूरी पर है।

मधुस्रवा आश्रम – Madhushrwa Asharam

मधुस्रवा आश्रम बिहार के अरवल जिले में स्थित एक बहुत ही प्राचीन मठ है। इससे बहुत से इतिहास जुड़ा हुआ है, कहा जाता है कि यहीं पर चवन ऋषि का जन्म हुआ था l और यहीं पर भगवान राम द्वारा मधेश्वरनाथ की पूजा गाय पिंड करने के दौरान किया गया था, यहां पर साल में तीन बार मिला लगता है जिसको देखने के लिए बहुत दूर दूर से लोग आते जाते रहते हैं। इस आश्रम को जन ऋती और पुराणों में उल्लेख किया गया है, वर्तमान यहां पर सरकार के द्वारा इक्का-दुक्का भवन निर्माण कराया गया है। मधुश्रवा आश्रम आप NH 98 से सड़क मार्ग के जरिए पहुंच सकते है।

मखदूम शाह मजार – Makhdum Shah Majar

अरवल जिले के सोन नदी के तट पर स्थित मखदूम शाह की मजार भी अरवल के धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यह मजार आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र माना जाता है, यहां पर बड़ी-बड़ी हस्तियों के द्वारा इस मजार पर चादर चढ़ाया जा चुका है। यहां के लोगों को कहना है कि यहीं पर सोन नदी से मिला हुआ एक पारस पत्थर रखा हुआ था जिसे सोना लोहे को छूने से सोना बन जाता था। मखदूम शाह की मजार का एक अलग ही दिलचस्प कहानी है। मखदूम शाह जब 13वीं शताब्दी में इस स्थान पर आए थे और यहीं पर अपना डेरा डालकर रहने लगे थे, तब मखदूम शाह एक दिन यहीं पर बैठे हुए थे तो यहां क्या स्थानीय लोग एक जिंदा आदमी को कफन में लिपटा कर इनके पास लेकर आएं और कलमा पढ़ने के लिए बोले मखदूम शाह ना जानते हुए किए जिंदा आदमी है और कलमा पढ़ दिए, ये सब देखकर लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, इसी प्रकार से उनको परेशान किया करते थे, एक दिन 1 दिन फिर वैसे ही वाकया हुआ और लोगों ने जिंदा आदमी को कफन में लपेट कर मखदूम शाह के पास लेकर आएं और कलमा करने के लिए बोल दिए थे, लेकिन मखदूम शाह कलमा पढ़ दिए है तो वह जिंदा आदमी मर गया यानी स्वर्ग को सिधार गया।

बुढ़वा महादेव मंदिर मंदिर – Bhudhwa Mahadev Temple

अरवल जिले जिले में स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर 60 वर्ष पुरानी है। यह मंदिर बिहार के महूदी पहाड़ की 500 फीट ऊंची चोटी पर स्थित है। पहले यह मंदिर झोपड़ी का हुआ करता था, उसके बाद खापड़ का बना उसके बाद धीरे-धीरे इसका विकास हुआ फिर बाद में इसे पक्का मंदिर चबूतरा बनाया गया। इस मंदिर में स्थापित एक शिव की प्रतिमा है जिसकी ऊंचाई लगभग डेढ़ फीट है। यहां के लोगों को मानना है कि इस मंदिर के पीछे एक कहानी है बताया जाता है कि यहीं के निवासी गणेश साहू को पुत्र नहीं हो रही थी, तो उन्होंने भगवान शिव से इसके लिए प्रार्थना की जब उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ उनके तीनों भाइयों ने मिलकर इस मंदिर का विकास किया।

लारी गांव – Lari Village

बिहार के अरवल जिले के कुर्था तहसील में स्थित है। यह गांव अरवल से 38 किमी की दूरी पर स्थित है। लारी गांव सती नगरी के नाम से भी जाना जाता है। इस यहाँ स्थित सती मन्दिर से प्रसिद्ध है, इस मंदिर का इतिहास ये है इसी गांव की एक महिला सोन मति अपने पति के शव के साथ सती हो गई थी। तब से यह मन्दिर लोगो के आस्था का केंद्र है। इस गांव में लगभग 348 घर है। जिनमे लगभग 2500 लोगो की आबादी है।

पंचतीर्थ घाम – Panchtirtha Dham

पंच तीर्थ धाम का एक धार्मिक महत्व है। इस तीर्थ का जिक्र बापू पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में जिक्र है। यहां पर एक प्राचीन शिवलिंग है। जिसकी स्थापना पांडव ने अपने अज्ञात काल में किए थे, यहां चैत और कार्तिक के बहुत बड़ी मेला लगती है। इस घाम का इतिहास महाभारत काल में भी वर्णन किया गया है। ऐसा यहां के स्थानीय लोगो को कहना है की, महाभारत काल में जब पांचों पांडव और कुन्ती ने कर्ण का चिता की राख को लेकर यही अंतिम संस्कार करने आए हुए थे। पंच तीर्थ धाम में 5 गज में स्वर्ग बसता है। यहां पर भगवान शिव की विशाल मंदिर है। यही पर भगवान विष्णु के दोनो चरण पादुका है। और सूर्य मंदिर भी है। यहां के लोगो का कहना है की पिंड दान करने बोधगया से भी लोग आते हैं।

बेलसार सूर्य मंदिर – Belsar Surya Temple

बेलसार सूर्य मंदिर अलवर जिले के सोन नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर आज से करीब 20 से 25 साल पहले जिले के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक था। इस मंदिर की चर्चा लोग मनोकामना मंदिर के रूप में करते हैं। आपको अगर यहां पर दर्शन करने जाना है। तो आप रविवार के दिन जाइए, क्योंकि इस दिन यहां पर काफी मात्रा में श्रद्धालु लोग आते हैं। यहां पर छठ के दिनो मे काफ़ी जायदा भीड़ जुटती है।

खटांगी सूर्य मंदिर – Khatangi Surya Temple

अरवल और औरंगाबाद जिले के सीमा स्थित खटांगी सूर्य मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिरो मे से एक है। भगवान भास्कर को समर्पित ये मंदिर है। इस मंदिर के भीतर जो मूर्ति रखी हुई है, वह मौर्यकालीन मानी जाती है, प्रतिमा पूर्णत्यः काले पत्थर से बनी हुई है। यहां के बुजुर्गों के अनुसार भगवान शिव की प्रतिमा खटांगी गढ़ से निकली हुई थी जिसे नेरा नदी के तट पर एक पीपल के वृक्ष के नीचे स्थापित किया गया था। यह कथा लगभग 200 साल पुरानी बताई जाती है। कहा जाता है की यहां का मंदिर का डिजाइन बहुत लंबा है। यहां पर तीन जिले से लोग आते है। यहां पर हर साल में कार्तिक और चैत के महीने में भव्य तरीके के छठ पूजा मनाई जाती है।

अरवल के मशहूर स्ट्रीट फूड – Famous street food of Arwal In Hindi

अरवल जिला के लोग ज्यादातर चावल दाल बड़े चाव से खाते हैं यहां का यह मुख्य भोजन में से एक माना जाता है रोटी भी यहां के लोग खाते हैं वैसे देखा जाए तो यहां पर चावल की खेती बहुत ज्यादा होती है। अरवल के स्वादिष्ट भोजन की बात करे तो बिरयानी, तंदूरी चिकन, चीज, राइस, पनीर, चिकन, और यहां पर मिलने वाले ये सब चीजे है|

अरवल किस चीज के लिए ज्यादा मशहूर है? – What is Arwal famous for?

अरवल जिला मेरे हिसाब से सूर्य मंदिर के लिए फेमस है क्योंकि अरवल जिला में सबसे ज्यादा सूर्य मंदिर ही आपको देखने को मिल जाएंगे। यहां पर चाय तो कार्तिक के महीने में छठ पूजा का बहुत ही भव्य आयोजन किया जाता है जिसके लिए पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है।

कैसे पहुंचे अरवल – How to reach Arwal

By Air – अरवल शहर के नजदीकी हवाई अड्डा पटना है, आप पटना से उतर कर यहां से अरवल के लिए बस से लेकर जा सकते हैं। पटना से अरवल पहुंचने में लगभग 2 से ढाई घंटे लग सकते हैं।

By Train – अरवल शहर के नजदीकी रेलवे स्टेशन जहानाबाद है। अगर आप लोकल से हैं तो यहां का लोकल स्टेशन अरवल है आप वहां पर उतर के भी आप अरवल जिले को घूम सकते हैं

By Road – अरवल शहर अगर आप सड़क मार्ग से आना चाहते है तो आप जहानाबाद, पटना, भोजपुर, से यहां के लिए बसें चलती है आप उनकी सहायता से अरवल जिला पहुंच सकते हैं।

नजदीकी आवास (होटल/रिसोर्ट/धर्मशाला)Accommodation (Hotel/resort/Dharamsala)

Hotel Aroma Contact Number – 9905230630

यात्रियों के लिए टिप्स – Tips for Travelers

अगर आप अरवल जिला आना चाहते हैं तो इस से पहले आपको अरवल जिले की पूरी जानकारी हासिल कर लीजिए, क्योंकि अरवल जिले में ज्यादातर घूमने वाले जगह नहीं है। यहां पर मुख्य रूप से चार या पांच अच्छी जगह है। जहां पर टूरिस्ट लोग आ कर आनंदित अनुभव कर सकते हैं। अगर आप यहां आने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो ध्यान पूर्वक आइए कोशिश करिए 1 दिन में पूरा घूमने का प्लान बनाइए। क्योंकि यह एक ग्रामीण क्षेत्र है।

रॉयल यात्रा टीम का एक अनुरोध (निवेदन) – A Request From The Royal Yatra Team.

अगर आप अरवल जिले का स्थानीय निवासी हैं, या आप अरवल जिले घूमने आए हैं या अरवल जिले आप घूम चुके हैं, तो आपको अरवल जिले की कौन सी सबसे चीजें अच्छी लगी आप नीचे कमेंट करके जरूर बताएं ।

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