एफिल टावर -एक़ अजूबा

कहते है इंसान क़े सामर्थ्य का कोई ओर अंत नहीं होता है। चाहत और लगन क़े बल पर इंसानों नें ऐसे ऐसे कारनामें किए जिसे देख इंसानों को खुद पर गर्व होता है, अनेकों ऐसी इमारत और संरचना है जो अनोखी है और अविश्वासनीय है।
आज उन्ही मे से एक़ टावर क़े बारे मे जानेंगे।
मेरा दवा है एफिल टावर क़े बारे मे ऐसे ऐसे तथ्य जानेंगे जिसे सुन कर और पढ़कर आपके होश उड़ जायेगा।

एफिल टावर फ्रांस की राजधानी पेरिस मे स्तिथ है। यह टावर पूर्ण रुप से शुद्ध लोहे से बनी है। इसका निर्माण 1886 मे शुरू हुआ और 1889 मे संपन्न हुआ।
यह टावर शैम्प-दे-मार्स मे सीन नदी पर बना है। इसकी भव्यता और आकृति को देख चौक जायेंगे।
एफिल टावर का निर्माण “गुस्ताव अईफील” क़े डिज़ाइन क़े अनुसार हुआ था यही इस टावर क़े प्रधान इंजीनियर थे।
और उहे क़े नाम पर टावर का नाम पड़ा एफिल टावर।
ज़ब इसका निर्माण हुआ तब यह दुनिया का सबसे बडा निर्माण था।
इस टावर की लंबाई 324 मीटर है जिसमे टावर की उच्चाई 300 मीटर है और ऐंटीना की लम्बाई 24 मीटर है। हैरानी की बात तो यह है की बगैर ऐंटीना क़े इफिल टावर फ्रांस की दूसरी सबसे बड़ी इमारत है, वही मियो फ्रांस का सबसे बड़ा इमारत है।
इस टावर मे तीन मंजिल भी और यह 365 दिन सैलानियों क़े लिए खुला रहता है। इसमें प्रवेश क़े लिए आपको टिकट खरीदना होगा।

एफिल टावर बनाने का उदेश्य –

एफिल टावर बनने क़े पीछे भी एक़ कहानी है।
दरअसल 1889 मे फ्रांस क्रांति की शताब्दी महोत्सव आने वाला था और वहां की सरकार इस क्रांति की वर्षगाठ को एक़ वैश्विक मेले क़े रुप मे आयोजित करने का निर्णय लिया गया था और उसी दरम्यान यह भी प्रस्ताव रखा गया की मेले मे प्रवेश क़े लिए एक़ बडा और सुन्दर प्रवेश द्वार बनाया जाना चाहिए।
पर इस निर्माण पर भी सरकार क़े 3 शर्ते थी :-

1. टावर की ऊंचाई कम से कम 300मीटर होना चाहिए।
2. टावर को पूर्ण रुप से लोहे का बनाया जाये।
3. टावर क़े चारो खंबो क़े बिच की दूरी 125 मीटर होना चाहिए।

इस प्रस्थाव पर देश -दुनिया क़े 107 इंजीनियर नें अपना डिजाइन दिया, जिसने से गुस्ताव ऐफिल का प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
मौरिस कोचलीन, ऐमिन लुगिये इस परियोजना क़े प्रमुख संरचनात्मक इंजीनियर थे और स्टिवन सौवेस्टे वास्तुकार थे।
इस विशाल टावर को बनाने मे 300 मजदूरों नें 2 साल 2 महीने और 5 दिन का समय लगा।
इसका उद्घाटन 31 मार्च 1889 को किया गया और 6 मई  1889 को इस टावर को आम जन और प्रयटकों क़े लिए खोल दिया गया। टावर बनने क़े बाद इसकी प्रसंशा और आलोचना दोनों ही हुई।
तब क़े नामचीन गायक और बुद्धिजीवी नें इसकी आलोचना की थी, जिसमे कहा गया था की टावर बनाना सरकार की सबसे मूर्खता भरा निर्णय है, इसे पैसे की बर्बादी और भी कई तरह की बाते हुई, जैसे की हमारे भारत मे किसी भी चीज पर आलोचना होने लगता है, किन्तु कुछ ही समय बाद वही आलोचक जिसने जमकट आलोचना की थी इफिल टावर की वही लोग टावर की वाहवाई करते थकते नहीं थे।
शुरुआत मे सरकार नें निर्णय लिया था की एफिल टावर को 1909 यानि बीस बरस क़े बाद पूर्णतः नष्ट कर दिया जायेगा किन्तु, देश दुनिया मे हो रही वाहवाई और सैलानियों का टावर को देखने आने की संख्या को देख टावर को नष्ट करने का निर्णय ख़ारिज कर दिया गया और दुनिया से एक़ अदभुत और बेहतरी संरचना नष्ट होने से बच गई।

एफिल टावर की कुछ विशेषताएं :-

एफिल टावर मे कुछ खास विशेषताएं जिसे आज आप जानेंगे और जिसे जानकारी आप इस टावर क़े मुरीद हो जायेंगे।
टावर मे चार स्तंभ है और प्रत्येक स्तंभ की एक़ दूसरे से दूरी 125 मीटर है और साथ ही साथ चारो स्तंभ क्रमशः पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर है।
पश्चिम, उत्तर और दक्षिण वाले स्तंभ से आप प्रवेश करेंगे और टिकट ले सकते है और पूरब वाले स्तम्भ पर लिफ्ट लगी जो आपको टावर क़े अंतिम छोर तक ले जाती है।
टावर मे तीन मंजिल है।

पहला मंजिल :-

57 मीटर यानि लगभग 186 फुट की ऊंचाई पर पहला मंजिल है और यहाँ आप लिफ्ट क़े जरिये पहुंचेंगे।
छत की क्षेत्रफल 4200 वर्ग मीटर है जो की 3000 लोग एक़ साथ आ सकते है। यहाँ से आपको पेरिस का एक़ अलग ही नज़ारा लगेगा और बहुत ही सुन्दर दृश्य देखने को मिलेगा। इस मंजिल पर एक़ रेसत्रो भी है और एक़ केफे भी है।

दूसरा मंजिल :-

115 मीटर यानि लगभग 377 फिट पर दूसरा मंजिल बनाया गया है। यहाँ पर भी आप लिफ्ट से ही जा सकते है और लिफ्ट से जाने मे तकरीबन 15 मिनट का समय लगता है। दूसरे मंजिल का क्षेत्रफल 1650 वर्ग मीटर है और इस पर एक़ साथ 1600 लोग आ सकते है।
इस मंजिल से पेरिस का सबसे खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलता है। ज़ब मौसम साफ रहती है तो यहाँ से आप 70 किलोमीटर तक आसानी से देख पाएंगे सर्दियों क़े मौसम मे यहाँ काफ़ी सर्द हवा चलती तो ज़ब भी जाये इस बात का आप जरूर ख्याल रखे।
यहाँ पर भी खाने की छोटी स्टॉल लगी रहती है और साथ ही साथ यहाँ दूरबीन भी रखा रहता है और आप उसकी मदद से फ्रांस की सुंदरता को एफिल टावर क़े दूसरे मंजिल से निहार सकते है।

तीसरा मंजिल :-

275 मीटर यानि 902  फिट की ऊंचाई पर तीसरा और अंतिम मंजिल है। इसके छत का क्षेत्रफल 350 वर्ग मीटर है और इस पर 400 लोग एक़ साथ आ सकते है।
इस तीसरे मंजिल क़े चारो ओर काच लगाया गाया है और बाहर की तरफ सुन्दर लोहे से आकृति बनाई गई है। इसी मंजिल पर इंजीनियर ऑफिस बना हुआ है और उन इंजीनियर का मोम का पुतला भी आपको तीसरे मंजिल पर देखने को मिल जायेगा।
इसके ऊपर भी एक़ उप-मंजिल बनाया गया है वहां आप सीढ़ियों की मदद से ही जा सकते है किन्तु, वहां जाना फिलहाल निषेध है और वही पर रेडियो और टेलीवीजन प्रसारण का ऐंटीना है।

ऐफिल टावर को देश-दुनिया क़े सैलानी देखने आते है और एक़ साल मे यहाँ औसतन 65 लाख प्रयटक आते है तो इस दृश्टिकोण से यह टावर फ्रांस और दुनिया क़े लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है और इसे 7 आजूबों मे से एक़ माना जाता है।
उम्मीद करता हु एफिल टावर से जुडी तथ्य और सच जानकर आपके क़े भी मन मे आया होगा की आप भी एक़ बार इस टावर को देख पाते।
आर्टिकल आज का कैसा लगा अपनी राय हमें कमेंट क़े जरिये भेजे।
कुछ त्रुटि रही हो तो क्षमा करे।

जानकारी का स्त्रोत -इंटरनेट और कुछ किताबें

धन्यवाद
लेखन :- गौतम राज़
             & टीम्स.

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