चीन का विशाल दिवार और उसका रहस्य

हमारी दुनिया आजूबों-गरीबो चीजों से भरी पड़ी, जिसे देख आप चौक जायेंगे और उसकी तारीफ करते भी नहीं थकेंगे।
आज हम भारत क़े पड़ोसी देश चाइना  की पहचान मानी जाने वाली और विश्व धरोहर क़े रुप मे विख्यात चीन के दिवार क़े बारे मे जानेंगे और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ की यह लेख आप पूरा पढेगे तो आपको सच मे यह अनुभूति होंगी की आप चीन क़े उस दिवार को देख रहे और उस पर चल भी रहे है।

चीन की दिवार का इतिहास

बात करते है इसकी इतिहास की तो यह दिवार आज से 2500 वर्ष पूर्व बनना शुरू हुआ और इसे “The Great Wall Of China” बनने मे लगभग 2000 वर्ष लग गए।

आपको बताते चले की चीन क़े सम्राट “किन शी हुआंग”  को यह दिवार बनाने का ख्याल आया और आने वाले 2000 वर्षो तक चीन क़े विभिन्न साशकों को द्वारा बनवाया गया।

वही चीन की दिवार 5वीं सदी ईसा पूर्व मे इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था और 16वीं सदी तक चलता रहा।

इस विशाल दिवार को आप अंतरिक्ष से भी देख सकते है और अंतरिक्ष यात्रियों का कहना है की अंतरिक्ष से चीन की दिवार को आसानी देखा जा सकता है और भारत क़े नक्शे क़े अलावा ऊपर से कुछ नहीं दीखता है। अब सोचने वाली बात है की अंतरिक्ष से भी अगर कोई दिवार दिख रहा तो आप कल्पना कीजिए उस की लंबाई और चौडाई कितनी होंगी।


दरअसल चीन की दीवार की कुल लम्बाई 6400 किलोमीटर है और इसकी चौडाई इतनी है की इस पर चार-से-पाँच ट्रक आसानी से चल सकते है या दस सैनिको की कतारबद्ध टुकड़िया आसानी से जा सकती है। इसकी ऊंचाई हर जगह एक़ समान नहीं कही पर इसकी ऊंचाई मात्र 9 फिट तो कही पर इसी की ऊंचाई 35 फिट तक है, इसका कारण यह है की दिवार का अधिकांश हिस्सा पहाड़ो पर बनाया जाना।

चीन की दिवार को बनाए जाने का कारण

अब आपके मन यह सवाल उठ रहा होगा की आखिर चाइना को इतना विशाल दिवार बनाने की आवश्यकता क्यू पड़ी?
तो ज़नाब चाइना पर भी हमला का खतरा बना रहता था और कई बार तो भीषण हमला भी हुआ और नरसंहार  भी खूब हुआ।

सबसे ज्यादा चाइना क़े साशकों को उत्तरी हमलावरो से डर बना रहता था, यही कारण है की चीन की दिवार का जन्म, उत्तरी हमलावरो क़े डर से हुआ।
दिवार को विशाल और किलानुमा बनाया गया ताकि सैनिको आसानी हो पहरा देने मे , जिसे साम्राज्य की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

किन्तु जिस सोच से चीन की दिवार को बनाया गया वह  पूरा नहीं हुआ और 1211 इसवीं मे चंगेज खान नें चीन पर हमला कर दिया और दिवार का एक़ हिस्सा तोड़ दिया। साथ ही साथ चीन मे भारी तबाही भी मचाई।

इसके उपरांत चीन क़े साशकों नें इस दिवार क़े कार्यों को तेजी से और मजबूती से करना शुरू किया।

चीन की दिवार की खासियत

चीन की दिवार जितनी विशाल है उतनी ही दिलचस्प इसके पीछे की कहानी है, बात करे ज़ब इसे बनाने का सुझाव आया तो, सबसे बड़ी समस्या यह थीं की जितना विशाल दिवार है उतना ही ज्यादा उसमे सामग्री लगेंगे और आएगा कहाँ से।
काभी मंथन क़े बाद निर्माताओं नें आस पास क़े पहाड़ो से कंकड़ की इकठा किया, पत्थरो और वही क़े मिट्टी का इस्तेमाल किया। इससे दो फायदे हुए एक़ तो सामग्री जो दिवार बनने मे लगने थे वह आसानी से और वही मिल गए और दूसरा की आस-पास क़े मिट्टी का भरपूर इस्तेमाल करने से उत्तरी भाग मे बड़े – बड़े गड्ढे हो गए इसे शत्रु को इस दिवार को पार करना कठिन हो गया और दिवार और भी विशाल प्रारूप ले लिया।

इसमें इस्तेमाल किए गए ईट और पत्थर को जोड़ने क़े लिए चावल क़े आटे का इस्तेमाल किया गया है।
और इसे एक़ किलेनुमा आकार मे बनाया गया था।

कही कही दिवार की ऊंचाई 35फुट तक थीं वहां स्तम्भनुमा आकार मे बनाया गया ताकि सैनिक आसानी से दुश्मनो को दूर से ही देख ले।

ये सब तो चीन की दिवार को एक़ विशाल और गौरवमई दिवार बनाता है किन्तु, एक़ काला अध्याय इस दिवार से जुडा है जो इसे क्रूरता का राजा बाना देता है, दरअसल इस विशाल दिवार को बनाने मे लगभग 10,00,000 मजदूरों नें काम किया और लगाता काम इनसे कराया जाता था, क्रूरता की शुरुआत होती थीं उन्हें एक़ समय का खाना देकर दिन रात काम करवाना और दिन रात क़े मेहनत क़े कारण कुछ की हप्तो और महीनों मे मजदूर बीमार या कमजोर हो जाते थे, यहाँ से क्रूरता और अमानवता की सारी हदे पार हो जाती थीं, बीमार पड़े मजदूर को इलाज कराने क़े जगह उन्हें जिन्दा ही उस दिवार मे दफ़न कर दिया जाता था।

यही कारण है की चीन की दिवार को दुनिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान कहा गया है।

आधुनिक परिवेश मे स्तिथि

आधुनिक परिवेश की बात करे तो युनेस्को नें चीन की दिवार को 1987 मे विश्व धरोहर क़े रुप मे मान्यता दी और साथ ही साथ दुनिया क़े 7 आजूबों मे से एक़ चीन का यह विशाल दिवार भी है।

यह दिवार एक़ समान नहीं है चूकि यह दिवार का निर्माण टुकड़ो मे करके हुआ था और इसके कई हिस्से एक़ दूसरे से अलग है अगर, इन्हे जोड़ दिया जाये तो दिवार की लंबाई 6400 किलोमीटर से बढ़कर 8848 किलोमीटर हो जायेगा।

आधुनिक परिवेश मे दिवार का एक़ तिहाई हिस्सा गायब हो चूका है, इसका सबसे बडा कारण मौसम मे बदलाव, भूकंप और यहाँ क़े लोगों द्वारा इसे बर्बाद करना है।

असल मे यहाँ क़े लोग इस दिवार क़े ईटो को 1960-70 क़े बिच निकाल कर घर निर्माण और बाज़ारो मे बेच देते थे। इस दिवार की एक़ ईट का मूल्य 3 डॉलर है।

हालांकि अब वहां क़े सरकार नें दिवार की सुरक्षा बढा दी ताकि यह दिवार बचा रहे।फिर भी यह चोरी थम नहीं रही।
1970 मे इसे पर्यटको क़े लिए खोल दिया गया और हर साल यहाँ एक़ करोड़ सैलानी इसे देखने आते है।

इस की  प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लागा लिए की इसे अमेरिका क़े राष्ट्रपति ब्राक ओबामा, इंग्लैंड की रानी अलीजाबेथ, रूस क़े राष्ट्रपति, क़े साथ साथ दुनिया क़े 450 नेता इसे देखने आ चुके है।

चीनी भाषा मे इसे “वान लीं छांग छंग” कहा जाता है जिसका अर्थ होता है चीन की विशाल दिवार।

तो कैसा लगा दुनिया का मानव द्वारा बनाया गया सबसे बडा संरचना “चीन की विशाल दिवार”, आप अपना राय हमें जरूर भेजे और इस साइड से जुड़े रहिये क्युकी, इसी तरह की रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी आपके सामने लाते रहते है। कुछ त्रुटि रह गई हो तो क्षमा करे।

धन्यवाद
लेखन -गौतम राज़ & टीम्स.

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