जीविका का मैंगो गार्डन (आम्र वण ) राजगीर

भारत का इतिहास बहुत ही गौरव पूर्ण और विकसित था यहां शास्त्र और हर एक प्रकार की ज्ञान की चीजें थीं।
यहां प्रतापी राजा हुए, यहां भगवान भी अवतरित हुए, यानी इतिहास के अनंत गहराई से लेकर अंतिम छोर तक भारत का संबंध रहा है।
ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार भारत का इतिहास गौरवपूर्ण बताया जाता है उसमें एक महत्वपूर्ण चीज जुड़ता है वह है भारतीय चिकित्सीय पद्धति,
आखिर कैसे होती होगी चिकित्सीय पद्धति आग से हजारों वर्ष पूर्व भारत में आज हम उसी के बारे में जानेंगे और देखेंगे।

जीविका का मैंगो गार्डन :-
जीविका का मैंगो गार्डन राजगीर में स्थित है, इसका इतिहास ढाई हजार वर्ष से भी पुराना है।
यहां पर आज से 25 वर्ष पूर्व मौर्य वंश के शाही चिकित्सक रहा करते थे और लोगों की इलाज किया करते थे।
इसे स्थानीय लोग यहां पर आम्र वन के नाम से पुकारते हैं। यहां पर मौर्यवंशी के शाही चिकित्सक रहा करते थे। इस स्थान को तब के राजा बिंबिसार ने दान स्वरूप वैद्य को दिया था, यहीं पर भगवान बुद्ध ने अपने घाव का इलाज कराया था।
शोध में हमें पता चला कि यहां पर उस समय विभिन्न प्रकार के जड़ी बूटी उपलब्ध थे जिससे उस समय इलाज किया जाता था, और आज जो अवशेष बचे हैं उसे अस्पताल के वह मात्र पत्थर और आकृति के रूप में बचे हैं।
आपको बताते चलें कि आम्र वन विश्व शांति स्तूप के ठीक बगल में है।
यहां आप जाकर भारत के पौराणिक चिकित्सा व्यवस्था को समझ पाएंगे और महसूस कर पाएंगे।
बात करें इसके समझना कि तो अभी के मौजूदा हालत में इसकी कोई भी खंडहर के रूप में भी कुछ भी नहीं बचा है बस कुछ पत्थरों से एक आकृति स्वरूप में बनाकर दर्शाया गया है कि यही वह स्थान है जहां पर आज से 2500 वर्ष पूर्व चिकित्सा व्यवस्था का परिचालन किया जाता था।
यह विश्व शांति स्तूप के रास्ते में पड़ता है इसीलिए यह भी एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विद्यमान है।
अगर आप इसके विषय में ज्यादा जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप हमारे युटुब चैनल रॉयल यात्रा (Royal Yatra)पर एक बार जरूर पधारें।
कुछ त्रुटि रह गई हो तो क्षमा करें।

धन्यवाद
लेखन -गौतम राज़

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