नया उत्खलित स्तूप के बारे में जानकारी (राजगीर)

राजगीर का इतिहास बहुत ही पुराना है किंतु कई बार यहां पर आए विपत्ति और प्राकृतिक आपदाओं ने इसके इतिहास को भूमिगत कर दिया था। आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे एक ऐसे इतिहास के बारे में जो कभी भूमिगत हो चुका था किंतु जब वह सामने आया तो सबको हैरान कर दिया।

New Excavated Stupa HISTORY

नया उत्खलित स्तूप:-

नवीन उत्खलित स्तूप जोकि राजगीर में है। यहां कुछ वर्षों पहले ही मलबों के अंदर से निकाला गया। जब आप इस स्तूप को देखेंगे तो यह आपको स्तूप कम कोई भवन या महल का कुछ भाग या मंदिर का कुछ अंश दिखेगा। इसमें इस्तेमाल किए गए ईटे खजूरीया ईटे हैं जो कि इसे लगभग 2500 वर्ष पुराना बनाता है यानी यह स्तूप बुद्ध कालीन है।

अभी के मौजूदा हालत में इसकी अवस्था जर्जर में है और ऊपर का जो छत का हिस्सा है वह पूर्ण रुप से गायब हो चुका है यहां तक की ऊपरी का भाग अधिकांश टूट चुका है और अब इस स्तूप में जंगल झाड़ी और घास-पूस निवास हो चुका है।
जब हम गए वहां पर तो वहां पर हमारे अलावा कोई नहीं था शायद लोगों को इसकी जानकारी नहीं है।हालांकि यह मुख्य मार्ग के बगल में ही और चक्रवाती दीवार के ठीक बगल में है।

बताया जाता है कि 1834 के आसपास राजगीर में भीषण भूकंप आया था जिससे यहां के तमाम पर्यटक स्थल को भारी नुकसान हुआ था और सबसे ज्यादा नुकसान इस इस स्तूप को हुआ था और बताया जाता है कि यह एक मलबे के अंदर में दब गया था जिसे बिहार सरकार ने हाल में ही इसे बाहर निकाला है।

इस स्तूप में चार कमरे बनाए गए हैं शायद ज्यादा हो लेकिन अभी चार कमरे ही हैं वह भी टूटे-फूटे अवस्था में। यह चारों कमरे एक बड़े चबूतरे यानी कि जमीनी स्तर से तकरीबन 7 से 8 फुट की ऊंचाई पर बनाई गई है। स्तूप के पीछे एक खाली मैदान है जहां पर चबूतरे बनाए गए हैं और बताया जाता है कि शायद भगवान बुद्ध यहां बैठ लोगों को या भिक्षुओं को उपदेश दिया करते होंगे।

यह स्तूप चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है यू कह सकते हैं कि यह स्तूप पहाड़ियों की गोद में बसा हुआ है।

मार्ग :-

यह नविन उत्खलित स्तूप बिहार राज्य के नालंदा जिले के राजगीर में स्थित है। यहां के नजदीकी हवाई अड्डा पटना हवाई अड्डा है।आप पटना से राजगीर रेल मार्ग या सड़क मार्ग दोनों ही मार्गों के द्वारा जा सकते हैं दोनों ही अति सुगम और अति सरल है। राजगीर स्टेशन से या स्तूप लगभग 4 से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्तूप कृष्ण चक्का पहिया निशान के ठीक आगे और चक्रवाती दीवार के ठीक पीछे हैं।

अधिक जानकारी और वीडियो के रूप में इसे देखने के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल रॉयल यात्रा(Royal Yatra) पर एक बार जरूर पधारें।कुछ त्रुटि रही हो तो हमें क्षमा करें।

धन्यवाद
लेखन -गौतम राज़
एडिट -ब्रजकिशोर & Royal Yatra team.

Leave a Comment