निरंजनी अखाड़ा के बारे में जानकारी (शिकारपुर मठ)

हम कितना भी विकास कर ले पर अपनी संस्कृति से दूर कभी नहीं हो सकते और ना ही अपनी पुरानी संस्कृति से ज्यादा विकास कर पाएंगे।सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति में हर एक चीज का महत्व है जैसे मंदिरों का महत्व है ठीक उसी प्रकार मठों का भी महत्व होता है तो साथियों आज की इस आर्टिकल में आप एक ऐसे मठ के बारे में जानेंगे जो भारतीय परंपरा के अनुसार महत्वपूर्ण हैं और साथ ही साथ मठ में बहुत सारे रहस्य छुपे हुए हैं। इस मठ यानी अखाड़ा में आपको आगे से देखने से महेज घर की तरह दिखेगा लेकिन मठ का पीछे का भागा और खासकर के अंदर के भाग मे जब जाएंगे तो आपको सुरंगे मिलेंगे भूमिगत घरे मिलेंगे जो की घोर अंधेरे में समाहित हैं और साथ ही साथ चमगादड़ओं का अड्डा बन चुका है आखिर में यह मठ कौन सा है कहां है और इसकी हालत अभी कैसे इतनी बुरी हो गई है इन सारी चीजों को हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत करने वाले हैं।

मठ के विषय में –

बिहार की राजधानी पटना से महज 20 किलोमीटर सोनपुर के शिकारपुर पंचायत ठीक बाजार में स्थित है मठ जिसे शिकारपुर मठ भी कहा जाता है। यह मठ गंडक के किनारे पर अवस्थित है। शिकारपुर मठ की स्थापना विजयानंद पुरी महाराज नए 1992 में किया था। यह मठ श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार के द्वारा संचालित होता है।इस मठ का रजिस्ट्रेशन 0542 है वही बात करूं अगर इस मठ के पास लगभग कुल 3.4 करोड़ की संपत्ति है। जिसमें 20 बीघा जमीन , एक मंडी विजयानंद सब्जी मार्केट ,100 दुकाने आदि अखाड़े के नाम पर है। इतना कुछ मटके पास होने के बावजूद मठ को संचालित करने में धन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती है क्योंकि जो भी सब्जी मंडी में व्यापारी है दुकानदार है या तो वह सही समय पर किराया नहीं देते हैं या तो बहुत कम या ना के बराबर देते हैं साफ शब्दों में कहूं तो यहां के लोगों ने अखाड़े के जमीन को हड़पने की मंशा बना चुके हैं।अखाड़े में शंकर जी हनुमान जी दुर्गा माता शनि महाराज और कुछ समाधिया के रूप में मूर्ति स्थापित है। इस मठ में दो बार पूजा होती है सुबह 5:00 बजे और शाम को 6:30 बजे से 7:00 तक। अभी मठ के व्यवस्थापक के रूप में दिगंबर सदानंद भारती है।

  • अखाड़े या मठ के मठाधीश की सूची–
  • ‌ विजयानंद पुरी महाराज
  • ‌ ममलेश्वर पुरी महाराज
  • ‌ भवानी भारती
  • ‌ सदानंद भारती
  • ‌ दिगंबर सदानंद भारती

मठ की सरचना

सामने की तरफ से देखने पर मठ बहुत ही साधारण दिखता है और ऐसा प्रतीत होगा की कोई साधारण सा घर है किंतु मठ के बाएं तरफ जब जाइएगा तो दो या तीन मंजिला ऊंची दीवार आप को दिखेगी और उस दीवारों से निकली हुई खिड़कियों के ऊपर बहुत ही सुंदर छछीदार नक्काशी की गई है जो इस मठ का आकर्षण है। मठ के प्रांगण में बहुत सारे मंदिर है जिसमें कई देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित है और एक शनि देव की मंदिर की स्थापना भी अभी की जा रही है।इसी रास्ते से आप मंदिर के पिछले भाग में प्रवेश करेंगे तो अंदर जाते ही दिन में भी आपको अंधेरा सा दिखेगा और अंदर की दीवारें कब टूट जाएगी इसका कोई अंदाजा नहीं है और जैसे ही आप इस द्वार से प्रवेश करते हैं तो बाएं तरफ आपको दो दरवाजे दिखते हैं जिसमें कोई दरवाजा नहीं लगा हुआ है। और उसी दरवाजे से अंडरग्राउंड यानी भूमिगत सुरंग देखी जा सकती है, अगर आप इसे देखना चाहते हैं तो हमारे यूट्यूब चैनल रॉयल यात्रा पर विजिट करिएगा और लिंक में इस आर्टिकल के अंत में दे दूंगा।मठ का यह भाग घोर अंधेरे में समाया हुआ है और आपको अजीब अजीब आवाज सुनने को मिलेंगे जिस में चमगादड़ की डरावनी आवाज , कबूतरों की आवाज, चूहों की आवाज और भी विभिन्न प्रकार के जीव जंतुओं की आवाज आपको मिल जाएंगी । मटके इस भाग में कोई आता जाता नहीं है इसी के कारण इसका रखरखाव बहुत ही खस्ता हालत में है जैसे ही आप दूसरे मंजिल और ऊपरी मंजिल में जाएंगे तो आप पाएंगे कि दीवारें और निचला भाग काफी जर्जर अवस्था में है और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।

मठ का संचालन कोन करता है और कैसे–

मठ का संचालन श्री निरंजनी पंचायती अखाड़ा हरिद्वार द्वारा संचालित होता है और मैं आपको बता दूं मठ सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। अब हम बात करेंगे कि यह मठ का आखिर में संचालन कैसे होता है और कैसे कहीं पर मठ की स्थापना होती है। तो आपको बता दूं कि सबसे पहले किसका मुख्य ब्रांच हरिद्वार में है और वही से सारे मठों का संचालन होता है मठ के प्रतिनिधित्व करने वाले जो भी लोग होते हैं वह ऐसे क्षेत्रों की चयन करते हैं जहां पर मठ की आवश्यकता दिखती है मठ में संस्कृत में पढ़ाई जाती है और अपनी संस्कृति की पढ़ाई करवाई जाती है साथ ही साथ आपको शास्त्रों , धर्म, उपनिषद सभी चीजों की पढ़ाई करवाई जाती है और अखाड़े में आपको शारीरिक रूप से भी प्रबुद्ध बनाया जाता है। आपको बता दूं की जो मठ के शाखा होती है जैसे कि शिकारपुर में उसका एक शाखा है उसे साल में एक बार ऑडिट से गुजरना होता है यानी हरिद्वार से लोग आते हैं और मठों की ऑडिट करते हैं और पता लगाते हैं की मठ सही तरीके से संचालित हो रहा है कि नहीं मठ के अधीन जो भी संपत्ति है वह सुरक्षित है कि नहीं और मठ को मुख्य ब्रांच को कोई कर नहीं देती है यह महाकुंभ के आयोजन में अखाड़े को महेज ₹10000 देते हैं।मैं आप सभी को बताना भूल गया की मठ के मठाधीश बनने के लिए आपको उस मठ से शिक्षा दीक्षा लेनी होगी और फिर उसका चयन होता है आपके योग्यता के अनुसार श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार के इष्ट देव है कार्तिक स्वामी यानी कि शंकर जी के प्रथम पुत्र और दिगंबर सदानंद भारती ने बताया कि कार्तिक जी ब्रम्हचर्य है।मठों की अवश्यकता–अब सवाल उठता है कि मठों की आवश्यकता क्या वाकई में है अगर है तो क्यों है?सबसे पहले मैं आपको इस बात से अवगत करा दूं कि सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति से लोग विरक्त हो रहे हैं या यूं कहूं कि वह अपनी संस्कृति से दूर जा रहे हैं, अपनी संस्कृति को भूल रहे हैं। बात यहीं पर खत्म नहीं हो जाती या मठों की आवश्यकता इस बात पर निर्भर नहीं करती। बल्कि देखा गया है कि गरीबी क्षेत्र वाले गांव या शहरों में धर्मांतरण बहुत ही तेजी से हो रहा है उसका सबसे बड़ा कारण यह मालूम पड़ता है कि लोगों को यहां पता ही नहीं कि उनका धर्म क्या कहता है उनके धर्म में उनका क्या महत्व है किंतु कुछ षड्यंत्रकारी लोग आपकी अज्ञानता का फायदा उठाकर आपको आपके धर्म के बारे में गलत जानकारी देकर अपने पंथ या अपने समुदाय में शामिल कर लेते हैं बात यहां पर ना बने तो उन्हें प्रलोभन देकर भी या डरा धमका कर धर्मांतरण जैसे कार्यों को अंजाम देते हैं। इस प्रकार अगर आपके क्षेत्र में कोई मठ होंगे तो आपको आपके धर्म की सही जानकारी होगी और मठ जो होते हैं वह आप को मुफ्त में शिक्षा देती है दीक्षा देती है आपको सफल बनाती है चाहे वह ज्ञान हो चाहे वह शारीरिक रूप से सबल बनाने की बात हो।इस प्रकार देखा जाए तो भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए मठों की आवश्यकता बेहद जरूरी दिखती है किंतु दुख की बात यह है कि कि आजकल जो मठ है उनका अस्तित्व खतरे में है और मठों का जो निर्माण किया जाता है वह कहीं ना कहीं अपने संकल्प के दिशा से भटक जा रहे हैं।आप सबों से आग्रह है कि आपके पास जो भी मंदिर मठ हो उसे जिंदा रखे उसकी रक्षा करें क्योंकि यह आपके संस्कृति से जुड़ा हुआ है यह आपके कल से लेकर भविष्य तक निर्धारण करने में योगदान करेगा।

लेखन – गौतम राज़

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