राजगीर के दर्शनीय स्थल एवं राजगीर में घूमने की जगह || Rajgir tourist place in Hindi

प्रिय पाठको आपको एक बार फिर से एक नए जगह से अवगत कराने जा रहा हूं जिसका नाम राजगीर है। तो दोस्तों लेख को पूरा अंत तक पढ़िए, तभी आपको राजगीर घूमने की हर जगह के बारे में आपको पूरी जानकारी मिलेगी।

राजगीर का परिचय – Rajgir basic information in Hindi

दोस्तों अगर मैं राजगीर की बात करो, तो राजगीर बिहार राज्य के नालंदा डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत एक शहर है। जहां पर लोग दूर-दूर से घूमने आते हैं। राजगीर पहले राजाओं का घर हुआ करता था। जो सात पहाड़ियों के बीच एक बसा हुआ प्राचीन शहर है। राजगीर का अर्थ राजगृह से होता है,

राजगीर पांचवी शताब्दी में मगध राजाओं की प्राचीन राजधानी थी। उसके बाद (460 से 440) ईसा पूर्व इसको पाटलिपुत्र राजधानी बना दिया गया। राजगीर अपने आप में एक अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि यहीं पर गौतम बुद्ध अक्सर इन सात पहाड़ियों के बीच में शांत वातावरण में रहते थे। और यहीं पर तीर्थ यात्रियों को भगवान बुद्ध उपदेश दिया करते थे उसके बाद एक-एक को बौद्ध धर्म में परिवर्तित कर दिए, यहीं पर आपको गृद्ध कुटा मिलेगा, जहां पर भगवान रहा करते थे

इसके अलावा जरासंध का इतिहास भी इस राजगीर से जुड़ा हुआ है, इसका उल्लेख आपको जैन और बौद्ध धर्म ग्रंथों में मिल जाएगा, यहीं पर महाभारत काल के समय और श्री कृष्ण की निशानियां मौजूद है।

राजगीर के पर्यटक स्थल – tourist place in Rajgir in Hindi

तो दोस्तों चलिए राजगीर के घूमने वाली जगह का नाम बताते हैं जो कि यहां आते हैं तो यह सब चीजें को आप लोग जरूर देखिए एक बहुत ही आकर्षक कर देता है जब इन सब चीजों को आप देख लेते हैं।

1. सोन भंडार गुफा – Sone Bhandar Cave

यह सोन भंडार गुफा बिहार के दो कृतिम गुफाओं में से एक है। यह गुफा जैनियों को हुआ करते थे। अगर इस गुफा की बात करें तो यह गुफा लगभग तीसरी या चौथी शताब्दी की है, अगर आप यहां आते हैं तो इस गुफा के अंदर आपको एक ही खिड़की मिलेगी जिसे अंग्रेजों ने तोप लगाकर तोड़ना चाहा और एक दरवाजा मिलेगा, जिसके अंदर अनुमान लगाया जाता है कि बहुत सारा खजाना है। कुछ लिखो का मानना है कि यह मौर्य साम्राज्य के समकालीन का है। इस गुफा के अंदर आपको शंख लिपि भी देखने को मिलेगा जिसे आज तक नहीं पढ़ा जा सका है।

2.जरासंध का अखाड़ा – jarasandh ka akhada

जरासंध का अखाड़ा जिसे रणभूमि के नाम से जाना जाता है यानी युद्ध का मैदान, यहां देश ही नहीं बल्कि दुनिया के दुर्लभ अखाड़ा में से अखाड़ा है। जरासंध का अखाड़ा मगध के महान प्रतापी राजा जरासंध की राजधानी ग्रीवार्ज थी। जिससे आज राजगीर के नाम से जाना जाता है, महाभारत के अनुसार यही पर भीम और जरासंध के बीच 28 दिनों तक मल युद्ध हुआ था और भीम ने जरासंध के शरीर को दो टुकड़ों में बांट दिया था। यह सारा वैभव पहाड़ी के पास स्थित है, इस रणभूमि की मिट्टी आज भी भुरभुरी है

3. पांडू पोखर – Pandu pokhar

पांडू पोखर राजगीर के 22 एकर इलाके में फैला हुआ है इतिहासकारों का मानना है, कि यहां पर पांडवों के पिता महाराज पांडु यहां पर स्नान करने आया करते थे, और यहीं पर महाराज पांडु इस स्थल का इस्तेमाल अस्तबल के तौर पर करते थे। इस पोखर के बीच में 40 फिट ऊंची महाराज पांडु की प्रतिमा स्थापित है, जिसे पर्यटक लोग नौकायान करते समय इसका लुफ्त उठाते है। यहां पर कई प्रकार के एडवेंचर गेम्स प्ले भी होता है। इस गार्डन के अंदर सुंदर सुंदर चीज देखने को मिलेगा। इस पांडू पोखर को देखने के लिए टिकट लिया जाता है।

4. गृद्ध कुटा की चोटी – GrididhaKuta Peak

गृद्ध कुटा वह स्थान है, जहां पर भगवान बुद्ध बैठकर अपना ध्यान केंद्रित किया करते थे, यह सुंदर दृश्य के साथ सुंदर जगह है। यहीं पर भगवान बुद्ध ने अपना दूसरा नियम चक्र चलाय थे, हर साल तीन महीने तक बारिश के मौसम के अपने शिष्यों को उपदेश दिए थे। यह स्थान विश्व शांति स्तूप के पास में ही पड़ता है। यह राजगीर के पर्यटन में से एक आकर्षित चोटी है। इस चोटी की ऊंचाई 400 मीटर की है।

5. ब्रह्म कुण्ड – Hot Sppring Rajgir

ब्रह्मा कुंड एक गर्म पानी का कुंड है, बताया जाता है की यहां पानी सप्तकर्णी गुफा से आती है। लोगों के मान्यता और पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी राजगीर के ब्रह्म कुंड के परिसर में ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने एक यज्ञ का आयोजन करवाया था। यहां पर आपको 22 कुंड और 52 जल धाराएं देखने को मिलेगी अगर आपको नहीं पता कि इसका निर्माण कैसे हुआ जब यज्ञ हो रहा था, तब देवी देवता आए हुए थे, जिनको एक ही कुंड में स्नान करने से परेशानी हो रही थी, तभी ब्रह्मा ने इतने कुंड का निर्माण किया था।

6. वीरयतन संग्रहालय – Veerayatan Museum

यह एक सुंदर संग्रहालय है, जिसका निर्माण 1982 ईस्वी में कराया गया था इस संग्रहालय के अंदर 50 से अधिक डायग्राम पैनल (मॉडल) देख सकते है, इस संग्रहालय के अंदर हस्त निर्मित आचार्य श्री चंदना जी द्वारा डिजाइन किए हुए 24 तीर्थंकर के जीवन और शिक्षा का कलात्मक प्रतिनिधि दिखाया गया है। जिसे देखने के लिए बहुत ही दूर-दूर से 5 मिलियन पर्यटक लोग यहां पर आ चुके है। इसमें लकड़ी से बने और धातु से बने 3D पैनल के कुछ आकृत्या भी देखने को मिलेगी, यहां जैन धर्म को समर्पित है,

7. अशोका स्तूप की चोटी – Ashoka Stupa peak

राजगीर में स्थित अशोका स्तूप का शिखर का निर्माण सम्राट अशोक ने स्वयं गृद्ध कुटा के सम्मान में किया था।19. इस स्तूप का निर्माण ईट से किया गया है, अशोका स्तूप अब खंडहर हो चुका है, जोकि कलाकंद तलाब के बगल में स्थित है यह स्मारक इतिहास के प्रेमियों के लिए एक दिलचस्प है, अशोका स्तूप के पास एक स्तंभ पर हाथी की एक मूर्ति बनी हुई है, इस जगह पर सबसे अच्छा सर्दियों के समय घूमने का होता है।

8. घोड़ा कटोरा झील – Ghora Katora Lake

घोड़ा कटोरा झील का नाम घोड़ा कटोरा इसलिए है क्योंकि इस झील का आकार घोड़े जैसा है या झील तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है इस झील में पैदल बोटिंग (Boating) की सुबिधा है। इस झील के बीच अभी तो आपको महात्मा बुध की एक विराजमान मूर्ति देखने को मिल जाएगी इस मूर्ति का निर्माण बलुआ पत्थर से किया गया है, जो कि 70 फीट लंबा है। इस दिल पर सर्दियों के दौरान लाइब्रेरियन और मध्य एशिया के प्रवासी पक्षियों का आना जाना लगा रहता है जिससे कि यहां का आकर्षण और बढ़ जाता है, राजगीर के सबसे स्वच्छ दर्शनीय स्थलों में से एक होने के लिए माना जाता है। कथाओं के अनुसार माना जाता है कि महाभारत के समय जरासंध अपने घोड़ों का अस्तबल यही रखा था।

9. बिंबिसार जेल – Bimbisar Jail

यह एक प्राचीन स्मारक है, यह गृद्ध कुटा हील के रास्ते में स्थित बिहार के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है बिंबिसार कारागार यह एक अभागा बाप का जेल है, जिसे अपने ही बेटों ने सत्ता के लालच में अपने बाप को कैद कर दिया था, अभी यहां देखने के लिए कुछ नहीं बचा है आप यहां जाते हैं, तो आपको एक खाली स्थान देखने को मिलेगा,

10. वेणु वन – Venu Vana

वेनुवन बौद्ध प्रवासी मटका पहला मठ था, अभी से बगीचे में तब्दील कर दिया गया है जहां पर भगवान बुद्ध कुछ समय के लिए रुके थे, इस बगीचे के अंदर एक तालाब और कई सारे पेड़ है और विभिन्न प्रकार के बांस के पेड़ लगाए गए हैं। यह राजा बिंबिसार के द्वारा उपहार में बुद्ध को रहने के लिए दिया गया एक मठ था।

11. मनियार मठ – Maniyar Math

मनियार मठ आपको स्वर्ण भंडार के रास्तों में देखने को मिलेगा इसे बौद्ध युग के दौरान एक यज्ञ के लिए बनाया गया था। गुप्त काल का यह अद्भुत नमूना बेलनाकार ईट से बना हुआ है। यह गहरे कुंआ के समान बना है। इसका आकर्षण 1.2 मीटर मोटी दीवार और 3 मीटर व्यास की 0.6 मीटर प्लास्टर किया और इसकी बाहरी भुजा के ऊपर गुप्त काल के भगवान की छवि देखने को मिलेगी ऐसा माना जाता है कि यहीं इच्छाधारी नाग-नागिन रहा करते थे।

12. शंख लिपि शिलालेख – Shankhalipi Inscription

यह एक बहुत ही आकर्षक स्थल है, यहां पर शंख लिपि में कुछ लिखा गया है जिसे कोई आज तक नहीं पढ़ पाया है इस लिपि की किताब नालंदा विश्वविद्यालय में रखा गया था। जिसमें एक बार आग लग जाने की वजह से शंख लिपि की किताब जल गई। जिस वजह से इस लिपि को कोई पढ़ नहीं पाया। इस लिपि की खोज 1836 में खोजी गई थी प्रिसेंप द्वारा पीतल त्रिशूल पर यह निशान मिला था। अगर आप राजगीर आते हैं तो यह शंख लिपि आपको स्वर्ण भंडार और रथ के पहिए का निशान के पास आपको देखने को मिलेगा

13. सप्तकारणी गुफा – Saptaparni Cave

सप्तपर्णी गुफा यानी 7 पानी वाला गुफा इसे सट्टा पानी सप्तपर्णी गुहा नाम से जानते हैं। लोगों का मानना है कि यहां पर भगवान अपने जीवन के अंतिम दिनों में कुछ दिन यहां पर बिताए थे। यहीं पर 500 भिक्षुको के एक पार्षद ने बुद्ध की मृत्यु के बाद भगवान बुध के चचेरे भाई आनंद के साथ बौद्ध धर्म की शिक्षा का प्रचार प्रसार करने के लिए आए थे। गुफा 300 मीटर ऊंची पहाड़ियों पर है। आपको ब्रह्मकुंड रास्ते आप यहां पर पहुंच सकते हैं, रास्ते में आपको जरासंध का बैठक मिलेगा।

14. आजाद शत्रु किला – Ajadshatru Fort

अजातशत्रु किला का निर्माण बुद्ध के समय सम्राट अजातशत्रु के नाम पर बनवाया गया था, यह किला लगभग 25000 साल पुराना है, यह किला चार कोनो के साथ एक आयताकार रूप में बनाया गया था। वर्तमान में अकेला खंडहर हो चुका है। यह किला भारत के सबसे प्राचीन किलो में से एक माना जाता है।

15. जीवाका का मैंगो गार्डन या अमरवाना – Jivaka Mango Garden

अमरवाना जगह बच्चों और वयस्कों के लिए प्रकृति से जुड़ी बहुत ही सुंदर जगह है, कुछ लेखकों का कहना है कि जब भगवान बुद्ध के चचेरे भाई देवदत्त द्वारा घायल होने के बाद भगवान बुद्ध जब बीमार हुए थे, तो उनका इलाज यहीं पर हुआ था। जीवक आजादशत्रु और बिंबिशार के दौरान एक शाही चिकित्सालय हुआ करता था। यहां पर पत्थरों से दीवार बना दी गई है जिसे पर्यटकों की दृष्टि से देखने के लिए आकर्षक लगे।

16. सोनभंडर गुफा – Son Bhandar Cave

सोन भंडार गुफा आपको स्वर्ण भंडार गुफा के बगल में देखने को मिलेगा। सोनभंडार के अंदर आपको जैन धर्म से जुड़ी बहुत से पत्थरों की मूर्तियां देखने को मिलेगी जो कि काफी प्राचीन दिखाई देगी, वर्तमान में कुछ मूर्तियां खंडित हो गई है। यहीं पर आपको दीवारों पर शंख लिपि दिखाई देगा।

17. श्री गुरु नानक शीतल कुंड – Shree Guru Nanak Sheetal Kund

श्री गुरु नानक शीतल कुंड राजगीर के एक दूसरे छोर पर स्थित एक गुरुद्वारा है। जहां पर सिख धर्म के मूल आत्मकथा मैं वर्णित है कि राजगीर में गुरु नानक किसी यात्रा का उल्लेख है। कुछ विद्वानों का मत है कि गुरु नानक जी ने बौद्ध और जैन भिक्षुकों को एक साथ यहीं पर प्रवचन दिए थे और बिना त्याग के भगवान की भक्ति का महत्व बताते हुए प्रभावित किए थे।

लोगों का मानना है कि जब राजगीर में चारों तरफ गर्म ही पानी था, तब गुरु नानक के इशारे पर लोगों ने एक जगह खुदाई की और वहां से ठंडा पानी बाहर निकला, ऐसे इतिहासिक झरने को श्री नानक शीतल कुंड के नाम से जाना जाता है। आज भी आप अगर यहां आते हैं तो या झरना आपको देखने के लिए मिल जाएगा।

18. चक्रवाती दीवार – Cyclopean wall

चक्रवाती दीवार मोर्टार के बिना चिनाई पत्थर के द्वारा बनाया गया है। यह शक्तिशाली चक्रवर्ती दीवार मोर मौर्य काल की राजाओं के दौरान बनाई गई थी, यह राजगीर को चारों ओर से घेरती थी। उस समय इसकी लंबाई लगभग 40 किलोमीटर थी। वर्तमान में इनमें से एक हिस्सा ही रह गया है जो कि राजगीर के रास्ते में दिखाई देता है।

19. करंदा तलाब – Karanda Tank

राजगीर में स्थित करंदा तालाब जिसका निर्माण मौर्य राजाओं ने लगभग 500 साल पूर्व किया था। इतिहासकारों का कहना है कि भगवान बुद्ध जब यहां पर प्रवास करते थे, उस समय इसी तालाब में स्नान किया करते थे, या तालाब बहुत ही आकर्षक है जिसे देखने के लिए पर्यटक और बौद्ध धर्म के अनुयाई आते रहते हैं।

20. जरासंध का बैठक – jarasandha ka Baithak

जरासंध का बैठक – jarasandha ka Baithak30. जरासंध का बैठक वैभव पहाड़ी के पास में स्थित यह स्थान है, माना जाता है कि श्री कृष्णा अर्जुन भीम, महाभारत के समय जरासंध के भगत के शासन काल के समय में इसका उपयोग किया गया था। सप्तप्रणी गुफा के रास्ते में आपको जरासंध की बैठक देखने को मिल जाएगी। इतिहासकार को मनाना है की लोग इसे चौकी मानते हैं, जिसमें रहने के लिए क्वार्टर के रूप में करते थे।

21. रथ के पहियों के निशान – Chariot Wheel Marks

Rajgir pic

राजगीर में स्थित रथ के पहियों का निशान 30 फीट लंबा गहरे निशान है। यहां पर आपको निशान के साथ साथ कुछ ऐसी चीजें दिखाई देगी जो महाभारत काल से जुड़ी हुई बताई जाती है, यहां के स्थानीय को कहना है कि जब श्री कृष्ण राजगीर आए थे, उसी समय श्रीकृष्ण के रथ के पहियों का निशान यहां पर पड़ गया, और यहीं पर आपको भीम के पैर के निशान, घुटने का निशान, पैर के अंगूठे का निशान, और केहूनी का निशान दिखाई देगा, इसके साथ साथ यहां पर आपको शंख लिपि भी दिखाई देगी जो 5 वी सदी में लिखी गई थी, अभी भी यह लिपि इतिहासकारों के लिए अज्ञात है।

22. पीपल गुहा – Pipal Guha

पीपल गुहा राजगीर के पांचवें पर्वत वैभव गिरी पर स्थित है। इतिहासकारों का मानना है कि भगवान बुध कुछ समय यहीं पर रुक कर व्यतीत किए थे इसके बाद उनके प्रमुख शिष्य और प्रथम संगति के अध्यक्ष रह चुके महा कश्यप का निवास स्थान भी यही रहा है। या एक समान चबूतरे जैसा बनाया गया है जिसकी लंबाई लगभग 25 मीटर और चौड़ाई 24 मीटर के आसपास है। जिसके नीचे गुफा हुआ करते थे जो 2015 के भूकंप के झटकों के कारण चट्टाने खिसक कर गुफा के अंदर जम गई, जिस से गुफा को बंद कर दिया गया, अभी भी वहां जाएंगे तो आपको दरारे देखने को मिलेगी। इसे जरासंध की गुफा भी कहा जाता है।

23. जापानी मंदिर – Japanese Temple

राजगीर का जापानी मंदिर मन मोह लेने वाला आकर्षक स्थल है, जहां पर आप को भगवान बुद्ध के ध्यान मुद्रा में एक बड़ा सा प्रतिमा देखने को मिलेगा, ठीक उसके बगल में आपको जापानी शीला देखने को मिलेगा, जिस पर जापानी मंत्र लिखा हुआ है। उसके बाद जपानी मंदिर में आपको राजगीर से जुड़ी जापान के महान व्यक्ति से जुड़े कुछ सामग्री देखने को मिलेगा। और जब जापानी पद्धति में कैसे पूजा की जाती है। और जापानी मंदिर के सारे सजावट आपको देखने को मिलेगा, यहां पर आएंगे आपको एक शांति का अनुभूति होगी।

24. मखुन्दम कुंड – makhudum kund

यह स्थान एक मुस्लिम सूफी संत मखदूम शाह का दरगाह है, यहां पर आपको गर्म झरने देखने को मिल सकते हैं। जिसका तापमान 450 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक है, यहां स्थानीय लोगों को कहना है कि इसे 13 वी शताब्दी के दौरान यही पर बारह वर्ष बिताए।

25. शीशा का पुल – Glass Bridge

बिहार का कहो या राजगीर का यह ग्लास ब्रिज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट राजगीर नेचर सफारी में यह ग्लास ब्रिज बनाया गया जो जमीन से 200 फीट ऊंचाई पर 50 फीट लंबा और 6 फीट चौड़ा है। सफारी एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो कि 500 एकड़ में स्थित ऐतिहासिक बुध मार्ग का रास्ता है जिसमें प्राकृतिक से जुड़ी बहुत सी चीज है देखने को मिलेगी यह ब्रिज कांच के पुल के तर्ज पर बनाया गया है

राजगीर के मशहूर स्ट्रीट फूड – Street Food Of Rajgir in Hindi

राजगीर के मशहूर भोजन की अगर बात करें तो यहां उत्तर भारतीयों जैसा ही भोजन होता है। जैसे कि बिहारी भोजन दाल चावल, रोटी सब्जी, और हालांकि कुछ स्थानों पर जापानी भोजन, कोरियाई और चीनी व्यंजन मिलते हैं। अगर फास्ट फूड की बात करें। तो यहां पर पिज़्ज़ा, पाव भाजी, पास्ता, डोसा, फ्रेंच फ्राइज, सैंडविच, आदि यहां के प्रसिद्ध फास्ट फूड है।

राजगीर किस चीज के लिए मशहूर है –what is Rajgir famous for

अगर बात करें कि राजगीर किस चीज के लिए मशहूर है, तो यह सबसे ज्यादा ब्रह्म कुंड के लिए प्रसिद्ध है, वही ब्रह्मकुंड जिसे सप्त ऋषि ने बनवाया था यह ब्रह्मा की पवित्र यग भूमि है, जो संस्कृति और वैभव का एक केंद्र है, और ब्रह्म कुंड का पानी बहुत ही गर्म होता है, जिस पानी में नहाने के लिए लोग बहुत दूर-दूर से आते हैं मकर संक्रांति के अवसर पर यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ लगती है, राजगीर भगवान बुद्ध और भगवान महावीर के लिए भी बहुत लोकप्रिय है, क्योंकि यहीं पर यह दोनों अपना समय बिताए थे, और यह सात पहाड़ियों के बीच में बसा हुआ एक शहर है, जिसकी वजह से यहां आने के लिए पर्यटक और भी आकर्षित होते हैं। इसके साथ-साथ राजगीर मौर्य समाज के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि मौर्य समाज का उदय यही हुआ था।

कैसे पहुंचे – How to reach

By Air – राजगीर आप हवाई जहाज के जरिए आना चाहते हैं, तो राजगीर की सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पटना मिलेगा, जहां पर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता की हवाई जहाज यहां पर आती है, इसके अलावा यहां पर भारत के बाहर से भी हवाई जहाज आती है, जैसे कि बैंकॉक, काठमांडू, कोलंबिया, आदि। पटना एयरपोर्ट से राजगीर की दूरी 98 किलोमीटर है, फिर आप यहां से ऑटो या बस से राजगीर पहुंच सकते हैं।

By Train – राजगीर आप रेलगाड़ी के जरिए भी पहुंच सकते हैं। जोकि राजगीर एक रेलवे स्टेशन है, जहां नियमित रूप से ट्रेनें चलती है आप राजगीर के नजदीकी रेलवे जंक्शन से राजगीर के लिए ट्रेन पकड़कर आप राजगीर स्टेशन आ सकते हैं। फिर आप यहां से ऑटो, टमटम, टांगा बुक करके राजगीर घूम सकते हैं।

By Road – राजगीर आप रोड के जरिए भी बहुत सकते हैं, आप अगर नजदीकी शहर से आते हैं, तो पटना, गाया, नालंदा, पावापुरी, बिहार शरीफ, से राजगीर के लिए प्राइवेट बसें चलती है। जिसके जरिए आप पर राजगीर पहुंच सकते हैं।

यात्रियों के लिए टिप्स :–

राजगीर आते हैं तो आपको कुछ टिप्स देते हैं, सबसे पहले आपको गंतव्य स्थल की जांच कर लीजिए, उसके बाद एडवांस में होटल बुकिंग ना करें, लोकेशन में पहुंचने पर ही होटल बुक करें, अगर रुकने की इच्छा हो तो आने से पहले पैकिंग का खास ख्याल रखें, जैसे कि कपड़ा पैकिंग, दवाइयां पैकिंग, यहां पर आप कोई साधन बुक करते हैं तो उनसे थोड़ा अच्छे से व्यवहार करें।

नोट – अगर आप राजगीर घूमने आए हैं, या राजगीर के रहने वाले हैं, या राजगीर घूमना चाहते हैं, आपको यहां पर सबसे अच्छी कौन सी चीजें लगी, कृपया करके कमेंट में जरूर बताएं।

मेरा नाम ब्रजकिशोर प्रजापति है और मैं एक यूट्यूबर हूं यूट्यूब के साथ साथ Blogging करने का कोशिश करता हूं जिसके माध्यम से लोगों को हमारी पुरानी विरासत और पुरानी धरोहर के बारे में बताने की कोशिश करता हूं। अभी मैं एम कॉम की पढ़ाई पढ़ रहा हु, हमे लोगो को हेल्प करना बहुत अच्छा लगता है। अगर आप हम से जुड़ना चाहते है तो सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते है।

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