वैशाली के दर्शनीय स्थल एवं वैशाली में घूमने की जगह || Vaishali tourist place in Hindi

प्रिय पाठको आपको एक बार फिर से प्रेम पूर्वक नमस्कार हमारे इस नए लेख में आपको वैशाली जिला का पूरी जानकारी मिलेगी, और यहां पर घूमने की जगह के बारे में पूरी जानकारी देंगे, इसलिए आप इस लेख को पूरे अंत तक पढ़िए ।


वैशाली का परिचय – Vaishali district basic information in Hindi :–


दोस्तों वैशाली भारत के बिहार राज्य का एक जिला है। वैशाली जिला गंगा घाटी का नगर है, जो आज के बिहार एवं बंगाल प्रांत के बीच एक सुंदर ही सुशोभित दृष्टि से देखा जाता है, इस जिले का नाम पहले विशाला भी हुआ करता था, कहा जाता है कि इसकी स्थापना महा तेजस्वी राजा विशाल के नाम पर रखा गया था, जो भारतीय परंपरा के अनुसार इच्छाकु वंश में पैदा हुए थे, जिसकी पहचान बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित आधुनिक बसाढ़ से की जाती है। जिसका उल्लेख बाल्मीकि जी ने अपने रामायण में की है।


वैशाली जिले के अगर भूगोल की बात करें तो, यह जिला बिहार के पटना, छपरा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और सारण जिला से सटा हुआ है। वैशाली जिला पहले मुजफ्फरपुर में हुआ करता था, सन 12 अक्टूबर 1972 को मुजफ्फरपुर से हटकर इसे वैशाली जिला बनाया गया, जिसका मुख्यालय आपको हाजीपुर में मिलेगा। 
ऐतिहासिक प्रमाणों से या पता चलता है कि यहां पर पहला गणतंत्र यानी फास्ट रिपब्लिक (First Republic) यहीं पर बना था।भगवान बुद्ध इस वैशाली जिले के धरती पर तीन बार आ चुके हैं| जिससे इसे वैशाली को कर्म भूमि भी कहा जाता है, महात्मा बुद्ध के समय 16 महाजनपदों में वैशाली का स्थान मगध के समान महत्वपूर्ण था, महात्मा बुद्ध के अलावा वैशाली की धरती पर अति महत्वपूर्ण बौद्धिक एवं जैन स्थल की उत्पत्ति हुई, इसके अलावा यहां पर पौराणिक हिंदू तीर्थ एवं पाटलिपुत्र जैसे ऐतिहासिक स्थल यहां पर नियुक्त है|


वैशाली को महान भारतीय दरबारी अम्रपाली की भूमि भी कहा जाता है। वैसे कई कथाओं में और बौद्ध साहित्य में यह दिखाया गया है, कि अम्रपाली बुद्ध की शिष्य बन गई थी, मनु देव संघ के संविधान लिच्वी का विलय के प्रसिद्ध राजा थे, जिन्होंने वैशाली में अपने नृत्य प्रदर्शन को देखने के बाद अमरपाली के साथ रहने का फैसला लिया।
यहां पर 24 वे तीर्थंकर जैन धर्म के प्रचारक भगवान महावीर का जन्म स्थल भी है, जोकि वैशाली के लिए काफी महत्वपूर्ण है, यहीं पर 599 ईसा पूर्व जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कुंडलपुर स्थान पर हुआ था। अगर बात करें भगवान महावीर यहां पर कितने साल तक रहे तो वह लगभग 22 वर्ष की उम्र तक रहे थे।

वैशाली के पर्यटक स्थल :- Tourist place in Vaishali in Hindi :

दोस्तों अगर आप वैशाली जिले की असली खूबसूरती को देखना चाहते हैं तो यहां पर आप मार्च-अप्रैल महीने में आइए यहां पर भगवान महावीर के जयंती के शुभ अवसर पर एक बहुत ही भव्य वैशाली महोत्सव मनाया जाता है, चलिए अब यहां के कुछ मुख्य पर्यटक स्थल है जो इस प्रकार है।


1 वैशाली संग्रहालय


वैशाली संग्रहालय वैशाली का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है इस म्यूजियम में आपको वैशाली में खुदाई के दौरान जितने भी पुराना अवशेष मिले हैं, वह यहां पर रखा गया है, जहां पर आपको भगवान विष्णु की मूर्ति, उमा शंकर की मूर्ति देखने को मिल जाएगी। अगर बात करें तो यहीं पर मूर्ति बिना सिर के लगी हुई मिलेगी।अगर बात करें इसकी स्थापना कब हुई थी, 1971 ईस्वी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इस को स्थापित किया गया था, यहां पर आपको लगभग 2000 साल या उससे भी पुराना चीजें मिलेगी, जिसका अंदाजा आप गुप्त काल, मयूर काल और वह हंस काल के दौरान जो जो सामग्री यूज होती थी वह सब इस म्यूजियम में रखा गया है।

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2 बुद्ध स्तूप
 बौद्ध स्तूप भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण के पश्चात यहां पर उसको का निर्माण किया गया था। इस स्तूप सन 1958 ईस्वी के खुदाई के दौरान इनके बारे में पता चला, जब पुरातत्व विभाग ने इसकी खुदाई किए, तो यहां पर भगवान बुद्ध के पार्थिव शरीर का अस्थि कलश मिला, जिससे कि यहां का स्थान का महत्व काफी बढ़ गया है।अगर आप यहां पर आते हैं तो Relic Stupa को जरूर देखें

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3. बावन पोखरबावन पोखर – Bauna Pokhar Vaishali

वैशाली के उत्तरी छोर पर बना बहुत ही प्राचीन मंदिर है,बावन पोखर का इतिहास भगवान विष्णु के 52 अवतार से जुड़ा हुआ है, बावन पोखर का निर्माण लगभग 400 वर्ष पुराना बताया जाता है, जब बावन पोखर की खुदाई हुई थी तो वहां पर बहुत ही ऐतिहासिक मूर्तियां पाई गई, जिसे वही के मंदिर में रखा गया है। जिसमें से कुछ मूर्तियां चोरी हो गई है और कुछ मूर्तियां अभी रखी हुई है। 

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4 जैन मंदिर

भगवान महावीर के जन्म स्थान वैशाली में जैन मंदिर है इतिहासकारों के अनुसार यह स्थान भगवान महावीर के जन्म के स्थान पर बनाए गए हैं जो कि एक बहुत ही प्राचीन जैन मंदिर है माना जाता है, कि यहां पर कई तीर्थ यात्रियों को कहना है, की यहां पर एक छोटी मूर्ति का नियमित अभिषेक होता है, जिसके शुद्ध जल से बहुत बड़ी से बड़ी बीमारियों का इलाज हो जाता है।यहीं पर लगभग 200 वर्ष पुरानी भगवान महावीर जी के मूर्ति है, जो सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य कालीन के समकालीन माना जाता है।

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5 राजा विशाल के गढ़ का भग्नावेश

अगर बात करें राजा विशाल गढ़ की तो यह वास्तव में एक बहुत ही छोटा सा किला है जिसकी परिधि की बात करें तो वह लगभग 1 किलोमीटर है उसके चारों तरफ ढाई मीटर ऊंची दीवार से घिरा गया है जिसके चारों तरफ 50 मीटर चौड़ी खाई है, जहां पर माना जाता है कि यहीं पर विश्व का पहला गणतंत्र संसद बना था, जहां पर 7777 लोग एक साथ इकट्ठा होकर सभी की समस्याओं को सुनते थे, और उन पर बहस किया करते थे। यह जगह आज की पर्यटक लोगों को लोकतांत्रिक प्रथा की याद दिलाता है

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6 विश्व शांति स्तूप

अगर आप पटना और हाजीपुर के तरफ से जाते हैं तो विश्व शांति स्तूप आपको अभिषेक पुष्कर के नजदीक ही बना हुआ मिलेगा, जिसका निर्माण जापान के निप्पोनजान म्योहोजी बौद्ध समुदाय द्वारा किया गया था, विश्व शांति स्तूप में आप गोल घुमावदार गुंबद अलंकृत सीरिया और उनके सामने दोनो तरफ सोने रंग से बड़े बड़े बने पहरा देते हुए सिंह दिखाई देंगे, सीढियों के सामने ही आपको ध्यान मुक्त अवस्था में बुध की प्रतिमा दिखाई देगी, यहां पर आपको भगवान बुद्ध की 4 प्रतिमाएं देखने को मिलेगी ।

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7 अशोक स्तंभअशोक स्तंभ

वैशाली का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। अगर आप वैशाली आते हैं, तो जरूर यहां पर विजिट करेंजैसा कि आपको पता होगा कि अशोक स्तंभ को बौद्ध धर्म को प्रचार करने हेतु सम्राट अशोक द्वारा बनाया गया था। ठीक वैसे ही वैशाली में सम्राट अशोक कॉलिंग पर विजय करने के बाद वैशाली में अशोक स्तंभ का निर्माण किया था। यह अशोक स्तंभ सारे अशोका स्तंभ से भिन्न है क्योंकि इस अशोक स्तंभ में केवल एक ही शेर हैं। बाकी अशोका स्तंभ देखेंगे तो वहां पर चार देखने को मिलेगा, यहीं पर भगवान बुद्ध बैठकर अपना अंतिम उपदेश दिए थे, उसी के याद में यह बनवाया गया था।

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8 अभिषेक पुष्कर्णी अभिषेक पुष्कर्णी

आपको ठीक विश्व शांति स्तूप के पास में मिल जाएगा, जो कि अभी झील है अभिषेक पुष्कर्णी का एक अलग ही इतिहास है, कहा जाता है कि जब वहां के राजा कोई बनता था तो अभिषेक करने के लिए जल इसी झील के पानी से ही उसका राज्य अभिषेक किया जाता था

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9 कुटागार शाला

कुटागार शाला को यहां बिहार करने आए लिच्छवियो द्वारा शाखामुनि के लिए बनाया गया था। जहां पर लोग बरसात के मौसम में रहते थे, जब पुरातत्व विभाग ने इसकी खुदाई की तो उत्खनन में इसके तीन चरण उजागर हुए मूल रूप से यह एक छोटा सा चैत्र था, दूसरे चरण में गुप्त काल के दौरान इसे ऊंचा मंदिर में डाल दिया गया, और अंत तीसरे चरण में बात करें गुप्त काल के दौरान विभाजन दीवारों को प्रदान करने के विषय में मंदिर से मठ में परिवर्तित कर दिया गया, जिसे बौद्ध स्तूप भी कहा जाता है, यहां पर खुले स्थान एवं बरामदा के साथ प्राचीन मठ के अवशेष मिलते हैं, अगर आप यहां आते हैं तो वैशाली के खूबसूरत जगहों में से एक यह स्थान हैं जहां पर आप जनवरी और दिसंबर में विभिन्न देशों के लोग यहां पर घूमने आते हैं।

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10. चौमुखी महादेव – Chaumukhi Mahadev

चौमुखी महादेव आप बसर बस स्टैंड से लगभग 2.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह एक हिंदू धर्म का प्राचीन मंदिर है। यहां पर सावन के महीने में बहुत ही भीड़ लगती है। चौमुखी महादेव या चतुर्मुखी महादेव भगवान शिव के समर्पित एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर है। जिसका निर्माण विक्रमादित्य ने करवाया था। यह एक विशाल शिवलिंग है। जिसमें आपको चार चेहरे वाला भगवान मिल जाएंगे। भगवान ब्रह्मा, विष्णु, शिव और सूर्य इन चार भगवान के चेहरे आपको इस शिवलिंग में मिल जाएंगे, जिनका मुख चारों ओर इशारा करते हैं, जबकि इस शिवलिंग को पांचवी शताब्दी के दौरान बनाया गया था। अगर इसका बात करें इतिहास की तो यह काशी विश्वनाथ मंदिर के समकालीन माना जाता है यह एक पवित्र मंदिर है

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11 जापानी मंदिर

ठीक शांति स्तूप के ग्राउंड में आपको जापानी मंदिर देखने को मिलेगा जहां पर जापानी पद्धति के द्वारा पूजा की जाती है, वहां पर आपको मंदिर में जपानी भगवान देखने को मिलेंगे और बहुत ही पुरानी चीजें रखी गई है, आप मोहित हो सकते हैं।

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वैशाली की मशहूर street food – street food of Vaishali in Hindi

यहां की मशहूर खाने की चीज आपको मसाल डोसा, पाव भाजी, पानी पुरी, यह सब चीजें खाने के लिए मिल जाएगी

वैशाली किस चीजों के लिए ज्यादा मशहूर है what is Vaishali famous for


वैशाली भगवान बुद्ध के कर्म भूमि को लेकर बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है यहां पर उनसे जुड़ी बहुत सी चीजें मिली है जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं, और यहां पर रहते हैं, घूमते हैं, और अपना विचार रखते हैं, यहीं पर आपको टूरिस्ट के हिसाब से बहुत ही प्रसिद्ध जगह है।

कैसे पहुंचे – How to Reach


By Air :- अगर आप बिहार की राजधानी पटना से वैशाली जाना चाहते हैं, तो वैशाली के निकटतम हवाई अड्डा पटना है। आप दिल्ली, मुंबई, बनारस, कोलकाता, लखनऊ या भारत के बाहर से भी हवाई जहाज के द्वारा पटना आकर यहां से रोड के द्वारा वैशाली पहुंच सकते हैं।
By Road :- वैशाली के सबसे नजदीकी शहर हाजीपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, बोधगया, राजगीर, नालंदा ऐसे शहर है। आप यहा से आसानी से वैशाली पहुंच सकते हैं।
By Rail :- वैशाली पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन की बात करें तो हाजीपुर है। जो वैशाली से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। यहां से महत्वपूर्ण ट्रेनें अपने निर्धारित समय से हाजीपुर से वैशाली जाती है, और आप भारत के प्रमुख शहरों से जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बनारस से आप हाजीपुर आ सकते हैं।

नोट – अगर आप वैशाली घूमने आए हैं या वैशाली जिले से हैं तो आप के अनुसार इस जिले का सबसे मशहूर चीज कौन सी है हमें कमेंट करके जरूर बताएं

मेरा नाम ब्रजकिशोर प्रजापति है और मैं एक यूट्यूबर हूं यूट्यूब के साथ साथ Blogging करने का कोशिश करता हूं जिसके माध्यम से लोगों को हमारी पुरानी विरासत और पुरानी धरोहर के बारे में बताने की कोशिश करता हूं। अभी मैं एम कॉम की पढ़ाई पढ़ रहा हु, हमे लोगो को हेल्प करना बहुत अच्छा लगता है। अगर आप हम से जुड़ना चाहते है तो सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते है।

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